#AAPSweep, #AAPKiDilli आखिरकार #DelhiDecides

अब जबकि दिल्ली के चुनावी दंगल का नतीजा आ चुका है और आम आदमी पार्टी ने बड़े बड़े धुरंधरों को धूल चटा दी है, तो पूरा भारत ये कहने के लिए बाध्य है #AAPSweep #AAPKiDilli।

70 में से 67 सीटें जीतकर AAP ने ना केवल इतिहास रच दिया है बल्कि बड़े बड़े राजनीतिक पंडितों के चुनावी समीकरणों का गणित बिगाड़ कर रख दिया है। ये आंकड़े जितने अन्य पार्टियों और जनता के लिए अविश्वसनीय उतने ही आम आदमी पार्टी के लिए भी।

शायद यही वजह है कि स्वयं केजरीवाल भी स्वयं को ये कहने से नहीं रोक पाये, “मुझे डर लग रहा है”। और ये कोई चुनावी जुमला नहीं था, एक सच्चे इंसान की अंतर्मन की आवाज़ थी जो कब्र तक संघर्ष करने का माद्दा तो रखता है पर अप्रत्याशित सफलता मिलने पर उम्मीदों का बोझ भी महसूस करता है क्यूंकि वह जानता है राजनीति उसके लिए कोई सोने का अंडा देने वाली मुर्गी नहीं बल्कि अग्निपथ है जिसपर से उसे लथपथ होकर गुजरना है।

कुछ शक्ति अपनों के साथ से मिली कुछ अपनों के साथ छोड़ने से। किसीने भगोड़ा कहा तो किसी ने अराजक, पर न उसने उम्मीद छोड़ी ना हिम्मत। और किसी ने सही कहा है, “कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं होता एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारों”।

खैर आसमान में सुराख़ का तो पता नहीं पर दिल्ली की राजनीति में अपने पाँव जरूर जमा लिए हैं अरविन्द केजरीवाल ने। और मुझे पूरा विश्वास है कि जब 15 फरवरी को केजरीवालजी रामलीला मैदान में शपथ लेंगे दिल्ली ही नहीं अपितु पूरे भारत की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत होगी, एक सुनहरे दौर की शुरुआत।

वन्दे मातरम्।

Image Courtesy: Financial Express

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चलिए एक नज़र उन ट्वीट्स वो इस ऐतहासिक घटना दास्ताँ बयान करते हैं।

 

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